Sunday, November 18, 2012

मुझे रोने दो 

ग़म को कुछ कम हो लेने दो बस जी भर के रो लेने दो दिल से लिपटे सब वादों को इस बारिश में धो लेने दो हम खुश है कुछ हुआ नहीं है कहते हैं तो कह लेने दो आप का तोहफा हैं यें आँसू दिल को फिर डुबो लेने दो आज हुआ क्या कुछ ना पुछो? बस जी भर के रो लेने दो

No comments:

Post a Comment